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छाया में सुखाए आंवले

ताज़े आंवले को पतला काटकर छाया में सुखाया जाता है, फिर एक या दो टुकड़े चबाए जाते हैं। नाम अक्सर धूप में सुखाया हुआ होता है, पर छाया टुकड़ों को झुलसने से बचाती है। यह खाने की छोटी आदत है।

स्टील की थाली में आंवले के पतले हरे टुकड़े, पास में दो पूरे आंवले, रसोई की मेज पर नरम छाया।

छाया में सुखाए आंवले के टुकड़े

ताज़ा आंवला खट्टा और तीखा होता है। पतले टुकड़े सुखाकर हफ्ते भर चबाना आसान रहता है। घरों में इन्हें धूप में सुखाया आंवला कहते हैं, भले प्लेट छाया में रही हो। तेज़ दोपहर की धूप टुकड़े को जला सकती है, इसलिए छाया बेहतर है।

दिन में एक या दो टुकड़े काफी हैं। मुट्ठी भर खाने से दाँत और पेट पर और खटाई पड़ती है। यह चबाने वाला फल है। तबीयत सच में खराब हो तो यह देखभाल की जगह नहीं लेता।

सामग्री

  • 2 या 3 ताज़े आंवले
  • आंवला धोने के लिए साफ पानी
  • छाया में सुखाने के लिए साफ थाली

बनाने की विधि

  1. आंवला धोकर पतला काटें और टुकड़े थपथपाकर सुखा लें।
  2. साफ थाली में छाया में फैलाएँ जब तक टुकड़े सूखे और लचीले न लगें। दिन में एक बार पलटें।

इस्तेमाल का तरीका

  • दिन में एक या दो सूखे टुकड़े चबाएँ।
  • एक बैठक में पूरी कटोरी न खत्म करें।
  • स्वाद बहुत तीखा लगे तो खाने के बाद एक टुकड़ा लें।

मददगार आदतें

  • कड़ी दोपहर की धूप से बेहतर छाया है, वरना टुकड़े झुलस सकते हैं।
  • सूखे टुकड़े साफ सूखी डिब्बी में रखें और कुछ हफ्तों में इस्तेमाल कर लें।

सावधानियाँ

  • ज्यादा आंवला खट्टा लग सकता है। एक या दो टुकड़ों पर रुकें।
  • खट्टा फल पेट या दाँतों को खराब करे तो न लें।
  • ये टुकड़े खाना हैं। तबीयत खराब हो तो देखभाल की जगह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आंवले के टुकड़े सीधी धूप में सुखाएँ?

छाया में सुखाएँ। नाम अक्सर धूप वाला होता है, पर तेज़ धूप टुकड़े झुलसा सकती है।

दिन में सूखे आंवले कितने चबाएँ?

एक या दो। बड़ी मुट्ठी बेहतर आदत नहीं है।

क्या ये टुकड़े डॉक्टर के पास जाने की जगह हैं?

नहीं। यह आंवला चबाने का छोटा तरीका है। बीमारी में सही देखभाल चाहिए।
लकड़ी की रसोई मेज पर गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा, ताज़ी तुलसी के पत्ते, अदरक की फाँकें और स्टील के कप में हल्का काढ़ा, दिन की रोशनी।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

15 मिनट

गिलोय और तुलसी का काढ़ा

गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा तुलसी और अदरक के साथ उबालकर एक कप बनता है। गर्भावस्था में इसे न लें। डॉक्टर ने न कहा हो तो इसे रोज़ का लंबा सिलसिला न बनाएँ।

नुस्खा पढ़ें
रसोई के पटरे पर अदरक की फाँकें, ताज़ी तुलसी के पत्ते, एक लौंग और स्टील के कप में हल्का भूरा काढ़ा।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

12 मिनट

बारिश में अदरक तुलसी काढ़ा

अदरक, तुलसी के पत्ते और एक लौंग पाँच मिनट उबालकर बारिश का छोटा कप बनता है। यह नम मौसम की गुनगुनी चुस्की है, बीमारी से बचने का वादा नहीं।

नुस्खा पढ़ें
चूल्हे पर छोटे तड़के के पैन में घी और एक नरम सुनहरी लहसुन की कली, पास में पीली दाल की कटोरी।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

10 मिनट

तड़के में भुनी लहसुन

एक लहसुन की कली थोड़े घी में नरम भूनकर दाल के साथ खाई जाती है। यह कच्ची लहसुन नहीं है और खाली पेट चबाने की चीज़ भी नहीं।

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