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गिलोय और तुलसी का काढ़ा

गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा तुलसी और अदरक के साथ उबालकर एक कप बनता है। गर्भावस्था में इसे न लें। डॉक्टर ने न कहा हो तो इसे रोज़ का लंबा सिलसिला न बनाएँ।

लकड़ी की रसोई मेज पर गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा, ताज़ी तुलसी के पत्ते, अदरक की फाँकें और स्टील के कप में हल्का काढ़ा, दिन की रोशनी।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

तुलसी के साथ गिलोय का छोटा काढ़ा

गिलोय का तना कड़वा होता है। मौसम बदलने पर कई रसोई में इसका छोटा टुकड़ा ही लिया जाता है। तुलसी के पत्ते और थोड़ी अदरक उस कड़वाहट को हल्के काढ़े में ले आते हैं। यह रसोई का कप है, दवा की जगह नहीं, और इससे रोग-प्रतिरोध की कोई पक्की बात नहीं बनती।

तना छोटा रखें और उबाल छोटा। गर्भावस्था में यह काढ़ा नहीं लेना। डॉक्टर ने अलग से न कहा हो तो हफ्तों तक रोज़ न चलाएँ।

सामग्री

  • ताज़े गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा
  • 6 से 8 ताज़े तुलसी के पत्ते
  • अदरक की 2 या 3 पतली फाँकें
  • 2 कप पीने का पानी

बनाने की विधि

  1. गिलोय धोकर हल्का कूटें और तुलसी के पत्तों तथा अदरक के साथ पानी में डालें।
  2. जब पानी लगभग एक कप रह जाए तब छानकर उसी दिन गुनगुना पिएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • मौसम के छोटे काढ़े के रूप में एक छोटा कप धीरे पिएँ।
  • डॉक्टर ने न कहा हो तो इसे रोज़ का लंबा क्रम न बनाएँ।
  • गर्भावस्था में बिल्कुल न लें।

मददगार आदतें

  • तना जितना छोटा, कप उतना हल्का।
  • स्वाद बहुत कड़वा लगे तो अकेले नहीं, खाने के साथ घूंट लें।

सावधानियाँ

  • गर्भावस्था में गिलोय का काढ़ा न लें।
  • डॉक्टर के बिना हफ्तों तक रोज़ न चलाएँ।
  • तबीयत बिगड़े, चकत्ते हों, या पहले से दवा चल रही हो तो डॉक्टर से बात करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गर्भावस्था में गिलोय का काढ़ा पी सकते हैं?

नहीं। गर्भावस्था में यह गिलोय का काढ़ा नहीं लेना।

क्या इसे महीनों तक रोज़ पी सकते हैं?

नहीं। यह छोटा कप है। डॉक्टर के बिना लंबा रोज़ का सिलसिला नहीं।

एक कप में गिलोय का तना कितना डालें?

सिर्फ एक छोटा टुकड़ा। मुट्ठी भर डालने से कप बेहतर नहीं होता।
स्टील की थाली में आंवले के पतले हरे टुकड़े, पास में दो पूरे आंवले, रसोई की मेज पर नरम छाया।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

10 मिनट

छाया में सुखाए आंवले

ताज़े आंवले को पतला काटकर छाया में सुखाया जाता है, फिर एक या दो टुकड़े चबाए जाते हैं। नाम अक्सर धूप में सुखाया हुआ होता है, पर छाया टुकड़ों को झुलसने से बचाती है। यह खाने की छोटी आदत है।

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रसोई के पटरे पर अदरक की फाँकें, ताज़ी तुलसी के पत्ते, एक लौंग और स्टील के कप में हल्का भूरा काढ़ा।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

12 मिनट

बारिश में अदरक तुलसी काढ़ा

अदरक, तुलसी के पत्ते और एक लौंग पाँच मिनट उबालकर बारिश का छोटा कप बनता है। यह नम मौसम की गुनगुनी चुस्की है, बीमारी से बचने का वादा नहीं।

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चूल्हे पर छोटे तड़के के पैन में घी और एक नरम सुनहरी लहसुन की कली, पास में पीली दाल की कटोरी।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

10 मिनट

तड़के में भुनी लहसुन

एक लहसुन की कली थोड़े घी में नरम भूनकर दाल के साथ खाई जाती है। यह कच्ची लहसुन नहीं है और खाली पेट चबाने की चीज़ भी नहीं।

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