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तड़के में भुनी लहसुन

एक लहसुन की कली थोड़े घी में नरम भूनकर दाल के साथ खाई जाती है। यह कच्ची लहसुन नहीं है और खाली पेट चबाने की चीज़ भी नहीं।

चूल्हे पर छोटे तड़के के पैन में घी और एक नरम सुनहरी लहसुन की कली, पास में पीली दाल की कटोरी।

दाल के साथ भुनी लहसुन की एक कली

तड़के में एक लहसुन की कली घी में नरम हो जाती है और कच्ची लहसुन जैसा तीखापन नहीं रहता। दाल के साथ यह साधारण खाना है। मौसम में कुछ रसोई यह आदत रखती हैं, पर एक कली से संक्रमण कम होने का वादा नहीं बनता।

खाली पेट कच्ची लहसुन अलग और ज्यादा तीखी बात है। उसे न करें। डकार, जलन हो, खून पतला करने की दवा चल रही हो, या कोई प्रक्रिया आने वाली हो तो रोज़ की कली से पहले डॉक्टर से पूछें।

सामग्री

  • 1 छिली हुई लहसुन की कली
  • तड़के के लिए घी की कुछ बूँदें
  • साथ खाने के लिए एक कटोरी पकी दाल

बनाने की विधि

  1. छोटे तड़के के पैन में घी की कुछ बूँदें गर्म करें।
  2. एक लहसुन की कली नरम और हल्की सुनहरी होने तक भूनें, फिर दाल के साथ खाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • भुनी कली अकेले नहीं, खाने के साथ खाएँ।
  • इसकी जगह खाली पेट कच्ची लहसुन न चबाएँ।
  • मात्रा एक कली है। कई कलियाँ सजाकर न खाएँ।

मददगार आदतें

  • नरम और हल्का सुनहरा रंग काफी है। जली काली कली कड़वी लगती है।
  • उसी चम्मच पर थोड़ी दाल हो तो कली आसानी से खाई जाती है।

सावधानियाँ

  • इसे कच्चा न खाएँ और खाली पेट न लें।
  • जलन, सूजन या तेज़ डकार आए तो बंद कर दें।
  • खून पतला करने की दवा हो या कोई प्रक्रिया तय हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या लहसुन की कली खाली पेट कच्ची खा सकते हैं?

नहीं। एक कली घी में भूनकर दाल के साथ खाएँ, कच्ची नहीं और खाली पेट नहीं।

इस आदत में लहसुन की कितनी कलियाँ हैं?

खाने के साथ एक कली। ज्यादा कलियाँ इसका मतलब नहीं।

क्या भुनी लहसुन से रोग-प्रतिरोध का वादा होता है?

नहीं। यह दाल के साथ खाना है। तबीयत हमेशा ठीक रहेगी, ऐसा वादा नहीं।
लकड़ी की रसोई मेज पर गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा, ताज़ी तुलसी के पत्ते, अदरक की फाँकें और स्टील के कप में हल्का काढ़ा, दिन की रोशनी।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

15 मिनट

गिलोय और तुलसी का काढ़ा

गिलोय के तने का छोटा टुकड़ा तुलसी और अदरक के साथ उबालकर एक कप बनता है। गर्भावस्था में इसे न लें। डॉक्टर ने न कहा हो तो इसे रोज़ का लंबा सिलसिला न बनाएँ।

नुस्खा पढ़ें
स्टील की थाली में आंवले के पतले हरे टुकड़े, पास में दो पूरे आंवले, रसोई की मेज पर नरम छाया।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

10 मिनट

छाया में सुखाए आंवले

ताज़े आंवले को पतला काटकर छाया में सुखाया जाता है, फिर एक या दो टुकड़े चबाए जाते हैं। नाम अक्सर धूप में सुखाया हुआ होता है, पर छाया टुकड़ों को झुलसने से बचाती है। यह खाने की छोटी आदत है।

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रसोई के पटरे पर अदरक की फाँकें, ताज़ी तुलसी के पत्ते, एक लौंग और स्टील के कप में हल्का भूरा काढ़ा।

रोग प्रतिरोधक क्षमता

12 मिनट

बारिश में अदरक तुलसी काढ़ा

अदरक, तुलसी के पत्ते और एक लौंग पाँच मिनट उबालकर बारिश का छोटा कप बनता है। यह नम मौसम की गुनगुनी चुस्की है, बीमारी से बचने का वादा नहीं।

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