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मुलेठी: एसिडिटी और गले के लिए राहत भरी चाय, बीपी की सावधानी के साथ

गायक और शिक्षक लंबे समय से गले को आराम देने के लिए मुलेठी की डंडी चबाते आए हैं। यह मीठी जड़ एसिडिटी में भी हल्का पारंपरिक सहारा है और त्वचा की देखभाल में आम सामग्री है। पर यह असरदार है — नियमित ज़्यादा मात्रा बीपी बढ़ा सकती है।

चित्र में मुलेठी, ताज़ा अदरक, बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

यष्टिमधु, यानी ‘मीठी डंडी’ — आयुर्वेद इसे मीठी और ठंडी, पित्त व वात को शांत करने वाली, गले और छाती को नरम करने वाली, पेट की सूजी परत को शांत करने वाली, और आवाज़, आँखों व त्वचा को पोषण देने वाली बताता है। इसका मुख्य तत्व ग्लाइसिराइज़िन मिठास और दुष्प्रभाव दोनों के लिए ज़िम्मेदार है: ज़्यादा मात्रा में इससे शरीर में नमक रुकता है और पोटैशियम घटता है। कम समय और संयमित मात्रा ही कुंजी है।

सामग्री

  • मुलेठी की 2 इंच की डंडी, या ¼–½ छोटा चम्मच मुलेठी चूर्ण
  • 1 कप पानी
  • कुछ सौंफ के दाने या अदरक का छोटा टुकड़ा (वैकल्पिक)

बनाने की विधि

  1. डंडी को हल्का कूटकर सौंफ के साथ पानी में 5 मिनट उबालें; छान लें।
  2. या मुलेठी चूर्ण गुनगुने पानी में घोलकर 5 मिनट रखें।

इस्तेमाल का तरीका

  • एसिडिटी या गले में खराश के लिए भोजन के बाद दिन में एक बार मुलेठी की चाय घूँट-घूँट पिएँ, एक-दो हफ़्ते तक।
  • ज़्यादा बोलने से आवाज़ थकी हो तो मुलेठी की छोटी डंडी धीरे-धीरे चबाएँ।
  • बाहरी रूप से, चुटकी भर मुलेठी चूर्ण गुलाब जल या दही में मिलाकर आरामदायक फ़ेस पैक बनता है।

मददगार आदतें

  • साबुत डंडियाँ भरोसेमंद दुकान से ख़रीदें; इनसे मीठी, मिट्टी जैसी ख़ुशबू आनी चाहिए।
  • आवाज़ को आराम दें और गुनगुना पानी पिएँ — ये किसी भी नुस्ख़े जितने ही ज़रूरी हैं।

सावधानियाँ

  • हाई बीपी, दिल की बीमारी, किडनी रोग या पोटैशियम कम हो तो न लें, और बिना सलाह 2 हफ़्ते से ज़्यादा नियमित प्रयोग न करें।
  • गर्भावस्था में न लें; छोटे बच्चों को सिर्फ़ डॉक्टरी सलाह पर दें।
  • मुलेठी बीपी की दवा, पेशाब बढ़ाने वाली दवा, स्टेरॉइड, डिगॉक्सिन और ख़ून पतला करने वाली दवाओं से टकरा सकती है — डॉक्टर से पूछें।
  • लगातार एसिडिटी, तीन हफ़्ते से ज़्यादा आवाज़ बैठना, या निगलने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से जाँच करवाएँ।

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