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सहजन (मोरिंगा): रोज़ के पोषण के लिए पत्तियाँ, फलियाँ और फूल पकाएँ

इतने भारतीय आँगनों में उगने वाला सहजन का पेड़ पोषण का ख़ज़ाना है। इसकी पत्तियाँ आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए और प्रोटीन से भरपूर हैं, और इसकी फलियाँ सांबर की जान हैं। फ़ायदा लेने का सबसे अच्छा तरीका है इसे नियमित रूप से भोजन की तरह पकाना।

चित्र में हल्दी की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद में सहजन को शिग्रु कहते हैं और इसे तीखा, गरम, कफ और वात के लिए अच्छा, और सूजन, सुस्त पाचन और कीड़ों में उपयोगी बताया गया है। दक्षिण और पूर्व भारत की रसोई में इसका हर हिस्सा हमेशा से प्रयोग हुआ है — सांबर में फलियाँ, भुजिया में फूल, दाल और थोरन में पत्तियाँ। आज मोरिंगा दुनिया भर में ‘सुपरफ़ूड’ पाउडर के रूप में बिकता है, पर जाने-पहचाने पेड़ की ताज़ी पत्तियाँ सस्ती भी हैं और उतनी ही अच्छी भी।

सामग्री

  • 2 कप ताज़ी सहजन की पत्तियाँ, डंठल से अलग की हुई
  • ½ कप पकी मूँग या अरहर दाल
  • 1 छोटा चम्मच घी या तेल, जीरा, 2 लहसुन की कलियाँ, चुटकी भर हींग, हल्दी और नमक
  • या: सांबर के लिए 2–3 सहजन की फलियाँ, उँगली भर के टुकड़ों में कटी

बनाने की विधि

  1. सहजन दाल: घी गरम करें, जीरा, हींग और कुटा लहसुन डालें, फिर धुली पत्तियाँ। 2–3 मिनट मुरझाने तक चलाएँ, हल्दी, नमक और पकी दाल डालकर 5 मिनट पकाएँ।
  2. या पत्तियों की सूखी सब्ज़ी (थोरन/पोरियल) कसे नारियल और राई के साथ बनाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • हफ़्ते में 2–3 बार भोजन के हिस्से के रूप में सहजन की पत्तियाँ या फलियाँ खाएँ।
  • पाउडर लें तो ½ छोटे चम्मच से शुरू करें और दाल, सूप या चीले के घोल में मिलाएँ, चम्मच भर कच्चा न फाँकें।

मददगार आदतें

  • आयरन बेहतर सोखने के लिए सहजन के व्यंजनों पर नींबू निचोड़ें।
  • नरम पत्तियाँ चुनें; अच्छी तरह धोएँ, क्योंकि पेड़ पर अक्सर इल्लियाँ होती हैं।

सावधानियाँ

  • भोजन के रूप में सहजन ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है। गर्भवती महिलाएँ सामान्य भोजन जितनी मात्रा ही लें और जड़, छाल व गाढ़े सप्लीमेंट से बचें।
  • सहजन ब्लड शुगर और बीपी घटा सकता है — डायबिटीज़, बीपी या थायरॉइड की दवा लेते हों तो सप्लीमेंट की मात्रा डॉक्टर से तय करें।
  • कम से शुरू करें; ज़्यादा मात्रा से दस्त हो सकते हैं।

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