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पाचन1 मिनट

भोजन के बाद सौंफ और मिश्री

खाने के बाद सौंफ-मिश्री सिर्फ़ मुँह की ताज़गी के लिए नहीं है। सौंफ की तासीर ठंडी है और हल्की एसिडिटी व पेट फूलने में इसे परंपरा से चबाया जाता है।

चित्र में सौंफ, मिश्री की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

सामग्री

  • 1 छोटा चम्मच सौंफ
  • मिश्री के कुछ दाने (वैकल्पिक)

बनाने की विधि

  1. हल्का सोंधा स्वाद चाहिए तो सौंफ को थोड़ा भूनकर ठंडा कर लें।
  2. मिश्री मिलाकर एयरटाइट डिब्बे में रखें।

इस्तेमाल का तरीका

  • भोजन के बाद आधा से एक छोटा चम्मच धीरे-धीरे चबाएँ।
  • पेय के रूप में — एक गिलास पानी में एक छोटा चम्मच सौंफ कुछ घंटे भिगोएँ, छानकर घूँट-घूँट पिएँ।

सावधानियाँ

  • डायबिटीज़ हो तो मिश्री न मिलाएँ।
  • सौंफ, अजमोद या गाजर परिवार के पौधों से एलर्जी हो तो न लें।
  • सीने में जलन या एसिड रिफ़्लक्स बार-बार हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।

मिलते-जुलते नुस्खे

फोटो में ताज़ा अदरक की जड़, नींबू के टुकड़े और सेंधा नमक का कटोरा।

पाचन

5 मिनट

खाने से पहले अदरक–नींबू का टुकड़ा

दोपहर के भोजन से पहले ताज़ा अदरक का छोटा-सा टुकड़ा नींबू और सेंधा नमक के साथ चबाना — सुस्त भूख को जगाने और अग्नि (पाचन शक्ति) को सहारा देने का पुराना तरीका है।

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फोटो में जीरा, धनिया और सौंफ के बीजों के साथ सुनहरी चाय का गिलास।

पाचन

10 मिनट

जीरा–धनिया–सौंफ की चाय

बीजों से बनी हल्की और सुकून देने वाली चाय, जिसे दिन भर घूँट-घूँट पिया जाता है। ज़्यादातर लोगों को यह आसानी से सूट करती है और खाने के बाद पेट फूलने या भारीपन में अक्सर ली जाती है।

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फोटो में अजवाइन के बीज, काला नमक और गुनगुने पानी का गिलास।

पाचन

2 मिनट

गैस में अजवाइन और काला नमक

अजवाइन का स्वाद तीखा और तासीर गर्म होती है। भारी भोजन के बाद कभी-कभार होने वाली गैस और मरोड़ में चुटकी भर अजवाइन काले नमक और गुनगुने पानी के साथ लेना रसोई का जाना-माना उपाय है।

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