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दालचीनी: असली दालचीनी बनाम कैसिया, और इसे प्रयोग करने के गरमाहट भरे तरीके

दालचीनी चाय, बिरयानी और सर्दियों की मिठाइयों में गर्माहट लाती है, और अक्सर ब्लड शुगर संतुलन के लिए चर्चा में रहती है। भारत की ज़्यादातर दुकानों में दालचीनी के नाम पर असल में कैसिया बिकता है, जो खाना पकाने में ठीक है पर रोज़ ज़्यादा मात्रा में नहीं। यहाँ जानिए दोनों में फ़र्क़ कैसे करें और दोनों को अच्छी तरह कैसे प्रयोग करें।

चित्र में दालचीनी, ताज़ा अदरक की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद में दालचीनी की छाल को त्वक कहते हैं — मीठी, तीखी और गरम, पाचन को जगाने वाली, कफ की जकड़न साफ़ करने वाली और रक्त संचार सुधारने वाली। असली दालचीनी (सिनामोमम वेरम, श्रीलंका और दक्षिण भारत से) की पतली, काग़ज़ जैसी, कई परतों वाली डंडियाँ होती हैं और स्वाद नाज़ुक होता है। कैसिया (सिनामोमम कैसिया) की छाल मोटी, सख़्त, एक परत वाली और स्वाद तेज़ होता है — और इसमें कूमरिन बहुत ज़्यादा होता है, जो नियमित ज़्यादा मात्रा में लिवर को नुक़सान पहुँचा सकता है। दालचीनी और ब्लड शुगर पर अध्ययनों के नतीजे मिले-जुले हैं, इसलिए इसे इलाज नहीं, मसाले की तरह ही लें।

सामग्री

  • दालचीनी की 1 इंच की डंडी (रोज़ के प्रयोग के लिए बेहतर हो असली दालचीनी)
  • दालचीनी-लौंग की चाय: 1 कप पानी, 2 लौंग, अदरक का एक टुकड़ा, कुछ तुलसी पत्ते

बनाने की विधि

  1. दालचीनी, लौंग और अदरक को पानी में 5 मिनट उबालें, आख़िर में तुलसी डालें, ढककर 2 मिनट रखें। छान लें।
  2. खाने में, पुलाव, बिरयानी या गरम मसाले वाली ग्रेवी की शुरुआत में साबुत दालचीनी घी में भूनें।

इस्तेमाल का तरीका

  • ठंडे, नम दिनों में या बंद नाक में दिन में ज़्यादा से ज़्यादा एक बार यह मसाला चाय पिएँ।
  • ज़्यादा चीनी की जगह ओट्स, फल, दलिया या कॉफ़ी पर ज़रा-सी पिसी दालचीनी छिड़कें।
  • रोज़ के खाने में गरम मसाले के हिस्से के रूप में प्रयोग करें।

मददगार आदतें

  • रोज़ ज़्यादा मात्रा में लेते हों तो ‘सीलोन’ या ‘असली’ दालचीनी ख़रीदें।
  • साबुत डंडियाँ साल भर स्वाद बनाए रखती हैं; पिसी दालचीनी कुछ महीनों में फीकी पड़ जाती है।

सावधानियाँ

  • कैसिया को खाना पकाने जितनी मात्रा तक रखें, ख़ासकर बच्चों और लिवर रोगियों के लिए; दालचीनी पाउडर चम्मच भर-भरकर न फाँकें।
  • दालचीनी के सप्लीमेंट ब्लड शुगर घटा सकते हैं — डायबिटीज़ की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें और बताया गया इलाज जारी रखें।
  • गर्भावस्था में दवा जितनी मात्रा से बचें। दालचीनी का तेल त्वचा और मुँह जला सकता है; इसे कभी न निगलें।
  • कुछ लोगों को दालचीनी स्वाद वाली च्युइंग गम और मिठाइयों से मुँह में छाले या एलर्जी हो जाती है।

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