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SagaHerbal

ताज़े मुँह के लिए तेल से कुल्ला (गंडूष)

सुबह सबसे पहले मुँह में तेल घुमाना मुँह की सफ़ाई के लिए बताई गई पुरानी आयुर्वेदिक विधि है। अच्छी दिनचर्या के हिस्से के रूप में इससे मुँह साफ़ और ताज़ा महसूस होता है।

चित्र में तिल, बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

सामग्री

  • 1 बड़ा चम्मच कोल्ड-प्रेस्ड तिल या नारियल का तेल

बनाने की विधि

  1. कुछ बनाना नहीं है — कमरे के तापमान वाला तेल लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • ख़ाली पेट, तेल को मुँह में और दाँतों के बीच 5–10 मिनट धीरे-धीरे घुमाएँ।
  • कूड़ेदान में थूकें (सिंक में नहीं, पाइप जाम हो सकता है), गुनगुने पानी से कुल्ला करें और फिर हमेशा की तरह ब्रश करें।

सावधानियाँ

  • तेल निगलें नहीं।
  • छोटे बच्चों के लिए नहीं — वे निगल सकते हैं या गले में अटक सकता है।
  • यह ब्रश, फ़्लॉस और दाँतों की जाँच की जगह नहीं ले सकता। दर्द, मसूड़ों से ख़ून या झनझनाहट हो तो डेंटिस्ट को दिखाएँ।

मिलते-जुलते नुस्खे

चित्र में लौंग, तिल की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

मुँह की देखभाल

2 मिनट

दाँत दर्द में अस्थायी राहत के लिए लौंग

लौंग में प्राकृतिक रूप से सुन्न करने का गुण होता है। दर्द वाले दाँत के पास लौंग दबाकर रखना डेंटिस्ट तक पहुँचने तक का जाना-माना कामचलाऊ उपाय है।

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चित्र में हल्दी, नारियल, तुलसी, शहद की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

मुँह की देखभाल

5 मिनट

मुँह के छालों में आराम: शहद-हल्दी, नारियल और ठंडा खाना

मुँह के छाले खाना और बोलना तक दर्दनाक बना देते हैं। चुटकी भर हल्दी वाला शहद छाले पर लगाना, नारियल के दूध या ठंडी छाछ से कुल्ला करना और कुछ दिन सादा, ठंडक देने वाला खाना — इनसे छाले आमतौर पर जल्दी भरते हैं।

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चित्र में सौंफ, इलायची, जीभ साफ़ करने का स्क्रेपर, लौंग की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

मुँह की देखभाल

3 मिनट

सौंफ, इलायची और जीभ की सफ़ाई से ताज़ा साँस

खाने के बाद का साधारण मुखवास — सौंफ, एक इलायची या एक लौंग — मुँह को प्राकृतिक रूप से ताज़ा करता है। इसके साथ रोज़ जीभ साफ़ करना और भरपूर पानी पीना हो तो मुँह की बदबू आमतौर पर दूर हो जाती है।

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