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पेशाब में आराम के लिए जौ का पानी और भरपूर तरल

गर्मी में और कम पानी पीने पर पेशाब में जलन आम है। घर का बना जौ का पानी, नारियल पानी और साफ़-सफ़ाई की आदतें राहत देने वाले सहारे हैं — पर पेशाब के संक्रमण की सही जाँच और इलाज ज़रूरी है।

चित्र में मिश्री, नारियल की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद दर्द और जलन वाले पेशाब को मूत्रकृच्छ्र कहता है और अक्सर पित्त की गर्मी और पानी की कमी से जोड़ता है। जौ (यव) को ठंडा और पेशाब बढ़ाने वाला बताया गया है, और जौ का पानी लंबे समय से भारतीय घरों का गर्मियों का पेय रहा है। भरपूर तरल मूत्र मार्ग को साफ़ करने में मदद करता है। मूत्र मार्ग का संक्रमण (यूटीआई) ख़ासकर महिलाओं में आम है और इसकी पहचान पेशाब की जाँच से होनी चाहिए।

सामग्री

  • 2 बड़े चम्मच जौ, धुले हुए
  • 4 कप पानी
  • आधे नींबू का रस; थोड़ी मिश्री (वैकल्पिक)

बनाने की विधि

  1. जौ को एक घंटा भिगोएँ, फिर पानी में 25–30 मिनट नरम होने तक धीमी आँच पर पकाएँ।
  2. छानकर ठंडा करें और नींबू का रस (और चाहें तो मिश्री) मिलाएँ। फ्रिज में रखें और एक दिन में इस्तेमाल करें।

इस्तेमाल का तरीका

  • दिन भर में 1–2 गिलास जौ का पानी पिएँ, साथ में सादा पानी और नारियल पानी भी।
  • हल्का पीला पेशाब अच्छे पानी के स्तर का संकेत है।

मददगार आदतें

  • पेशाब देर तक न रोकें; मूत्राशय पूरी तरह ख़ाली करें।
  • आगे से पीछे की ओर पोंछें, संबंध के बाद पेशाब करें, और सूती अंतर्वस्त्र पहनें।
  • जलन हो तो बहुत तीखा खाना, ज़्यादा चाय-कॉफ़ी और शराब से बचें।

सावधानियाँ

  • जौ में ग्लूटेन होता है — सीलिएक रोग हो तो न लें। डायबिटीज़ हो तो मिश्री न डालें।
  • किडनी या दिल की बीमारी में पानी सीमित हो तो तरल बढ़ाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
  • एक-दो दिन से ज़्यादा जलन, बुखार, कमर या बगल में दर्द, पेशाब में ख़ून, उल्टी, या गर्भावस्था, पुरुषों, बच्चों या डायबिटीज़ वालों में पेशाब की कोई तकलीफ़ हो तो डॉक्टर को दिखाएँ — एंटीबायोटिक की ज़रूरत हो सकती है।

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